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आपने आख़िरी बार अपनी कार का ओवरहॉल या कम्प्यूटर को फॉरमेट कब किया था?
आपकी रसोई या पूरे घर की बड़ी सफाई कब हुई थी?
और आपकी भावनाओं का ओवरहॉल कब हुआ था?

हाँ, मैं जनता हूँ कि ये सब तो मशीनें हैं...या निर्जीव चीज़ें हैं.  वही तो बात है. हम अपनी ज़िंदगी की निर्जीव चीज़ों और मशीनों की देखभाल और रखरखाव भी अपने शरीर या अपनी भावनाओं के रखरखाव से बेहतर तरीके से करते हैं.

और करना भी चाहें, तो वो करते कैसे हैं? आजतक हमें अपनी भावनाओं के रखरखाव, उनकी सर्विसिंगयाओवरहॉलके बारे मेंकभी बताया या सिखाया ही नहीं गया है.

अब आपके पास वो तरीका है.

गागा.

हमारे सारे व्यक्तिगत सेशन्स और वर्कशॉप्स में ईएफटी आपके लिये एक बड़े ही शक्तिशाली 'यंत्र' या प्रक्रिया के द्वारा काम करता है. एनर्जी सायकॉलॉजी की कई धाराओं के आधार पर विकसित हुआ 'गागा' आपको अपने विचारों और भावनाओं के दरवाज़ों तक पहुँचने का नक्शा देता है, जिन्हें आप ईएफटी की चाबी से खोल सकते हैं.

दूसरे शब्दों में, गागा, एक जाँच प्रक्रिया है, जिससे आप अपने भावनात्मक और विचारों को खंगालकर अपने सबसे ऊंचे विचार, सबसे अच्छी भावना और अपनी सबसे साफ़ सोच तक पहुँच सकते हैं.

आप गागा का इस्तेमाल किसी खास लक्ष्य तक पहुँचने तक भी कर सकते हैं. ओवरहॉल साथ-साथ अपने आप हो जायेगा.

"लेकिन इस शब्द 'गागा' का क्या मतलब है...? ख़ुद पता लगाइये.

गागा हमारे द्वारा विकसित किया हुआ एक जाँच यंत्र है. इसका आधार योगवासिष्ठ, हील योर बॉडी (लूईस हे), आस्क ऐंड इट इज़ गिवन (एब्रहम हिक्स), गेटिंग वेल अगेन (ओ कार्ल सिमोनटन), ताओ ते चिंग, अष्टावक्र गीता, दस स्पेक जे, आदि हैं.

तो एक बार फिर, गागा आखिर है क्या?

गागा सवालों, अधूरे वाक्यों, आदि की शृंखलाओं का एक ढाँचा है. ये शुरु होता है जो साफ है और जो दिख रहा है उससे, और धीरे-धीरे वह सब सतह पर लाने लगता है जो आपसे छुपा है, कई परतों के नीचे, और आपके स्वास्थ्य, आपके भानात्मक स्वास्थ्य के आड़े आ रहा है.

आप गागा के नक्शे से अपने बंद दरवाज़े, बंद तालों को ढूँढकर उन्हें ईएफटी या किसी और चाबे से खोल सकते हैं.
गागा से आप इन सारी जगहों पर काम कर सकते हैं:

  • मुझे क्या नहीं चाहिये ?
  • मुझे क्या चाहिये ?
  • जो चाहिये उसके मिलने पर मुझे क्या नुक्सान होंगे, जिनके कारण शायद मैं उसे रोक रहा हूँ ?
  • जो नहीं चाहिये उसके होने से मुझे क्या फायदे हैं, जिनके कारण मैं इन्हें पाले हुए हूँ ?
  • जो चाहिये, वो अगर नहीं भी मिले तो ऐसा क्या-क्या है जो वैसा-का-वैसा रहेगा?आदि

हम इन सबमें गहरे जाते हैं. प्रेरित, प्रोत्साहित, उभारने वाली और कई बार थोड़ा-सा उत्तेजित करने वाली प्रक्रियाओं से वह सबकुछ, जो दबा-छुपा है, बाहर आने लगता है.

जब वो बाहर आ जाताहै,
तब हम नेगेटिवको घुलाकर साफ़ ,और अपनी असली चाहतों को मज़बूत कर सकते हैं.
जब आप किसी प्रैक्टीशनर के साथ, किसी वर्कशॉप में, या अपने आप, गागा का उपयोग करते हैं, तो वो आप इन सारी जगहों को तलाशकर, उनसे आपके रिश्ते को असलियत में बदल पाते हैं.
 
आप गागा को सीख या इस्तेमाल इन तरीकों से कर सकते हैं:
     
   
 
 
 
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